Monday, February 17, 2014

रब
कहते है की महबूब  रब होता है
पर बन जाता है पत्थर की  मूर्त
बेवफा वो जब होता है
ऐ मेरे यार मत बन बेवफा
कभी कभी ही मिलते है सच्चे चाहने वाले
वरना मंदिर में भी पाखंडियो का मेला लगा होता है

Wednesday, February 12, 2014

जरूरत 

मन को  कुछ भी अच्छा नही लगता
कंही कोई रिश्ता सच्चा नही लगता
सब करना चाहते है एक दूसरे  का इस्तेमाल
करते है सब हर दम खुशिया तलाश
पर फिर भी सब दीखते है उदास
न जाने क्यों कोई हँसता नही लगता

ऊँची हंसी, कहकहे, ये ऐश आराम,
मगर फिर भी है सबके दिल परेशान
बहुत अकेला है मन
नही लगता की कोई चलेगा संग
हर पल अपने पराये की परिभाषा बदल रही है
और आने से हर रिश्ते की सच्चाई सामने
जीवन की आशा अब निराशा में बदल रही है

बड़े अरमानो से सजोया था
इस जिंदगी में रिश्तो की बगिया को
जो कि अब अपने आप में ही
एक तमाशा बन रही है

ऐ दूसरो को इस्तेमाल करने वालो
पहले अपने सामर्थ को तो पूरा इस्तेमाल करना जानो
जब खुद को इस्तेमाल करना सीख जाओगे
तब हो जाओगे खुद में बुलंद इतना कि
किसी और को नीचा दिखाने की
जरूरत ही नही महसूस कर पाओगे II
  
लेखक : प्रवीन चन्द्र झांझी